!!! सावधान !!! इन तरीकों से आपका पैसा चुराते हैं हैकर्स आप सावधान रहे

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500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद हमारे देश में ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्म में बढ़ोतरी हुई है और गवर्नमेंट भी उसे बहोत बढ़ावा देरही है । पिछले कुछ समय से देश में ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों की संख्या भी बहोत बढ़ी है। शॉपिंग के अलावा ऑनलाइन बैंकिंग और बिल पेमेंट जैसे कई काम किए जाते हैं। इससे सुविधा तो होती है, मगर हैकर्स का खतरा भी बना रहता है। पिछले दिनों एसबीआई, यस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और ऐक्सिस बैंक जैसे बड़े बैंक के खाते भी हैकिंग के शिकार हुए है।

हैकर्स से बचने के लिए और अपना अकाउंट हैक होने से बचने के लिए ये चीज़े आपको पता होने चाहिए.

1. फिशिंग
फिशिंग का एक बहोत ही मसहूर तरीका ये भी है के :- तकनीक के तहत धोखाधड़ी करने वाले आपको नकली वेबसाइट पर ले जाते हैं, जो देखने में एकदम असली लगेगी। जैसे ही आप ट्रांजैक्शन करने के लिए अपन नेटबैंकिंग या कार्ड की डीटेल्स डालेंगे, उसे हैकर्स चुरा लेंगे और बाद में मिसयूज करेंगे।
2. विशिंग (vishing)
फिशिंग में स्पैम मेल के जरिए बेवकूफ बनाया जाता है। आपको लगेगा कि ईमेल असली सोर्स से आई है, मगर वह हैकर्स द्वारा भेजी गई होती है। इसी तरह से मोबाइल फोन के मेसेज या SMS के जरिए ऐसा करने को Vishing कहा जाता है। इस तरीके से आपको बातों में फंसाकर आपका पासवर्ड, पिन या अकाउंट नंबर हासिल कर लिया जाता है।

3.  मैलवेयर ( Malware)
हैकर्स ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करते हैं जो एटीएम या बैंक सर्वर्स के कंप्यूटर सिस्टम को डैमेज कर देते हैं। इससे वे आप की जानकारियां हासिल कर लेते हैं।

4. कीस्ट्रोक लॉगिंग ( Keystroke logging)

आप गलती से कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर लेते हैं, जो चुपके से आपकी जानकारियां (नेटबैंकिंग के पासवर्ड और कार्ड की डीलेट्स आदि) हैकर्स को भेजता रहता है।

5.फार्मिंग ( Pharming)
इस तकनीक के तहत धोखाधड़ी करने वाले आपको नकली वेबसाइट पर ले जाते हैं, जो देखने में एकदम असली लगेगी। जैसे ही आप ट्रांजैक्शन करने के लिए अपन नेटबैंकिंग या कार्ड की डीटेल्स डालेंगे, उसे हैकर्स चुरा लेंगे और बाद में मिसयूज करेंगे।

6. सिम बदल कर (SIM reissue)

इस तरीके से फ्रॉड करने वाले लोग आपके नकली आईडी प्रूफ की मदद से आपके मोबाइल ऑपरेटर से ड्यूप्लिकेट सिम कार्ड हासिल कर लेते हैं। ऑपरेटर आपके असली सिम को डीऐक्टिवेट कर देता है और ठग आपके नंबर पर वन टाइम पासवर्ड (OTP) जेनरेट करके भारी-भरकम ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस कर लेता है।

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